Photo: Lingaram Kodopi

“I Cannot Tell If There Will Ever Be Peace In Bastar”: Lingaram Kodopi, Soni Sori’s Nephew Speaks Out

This is the status update made by Soni Sori’s nephew- Lingaram Kodopi giving his account of what happened after most of Ms. Soni’s family was picked up by the Dantewara police (link to the lawyer’s statement we published) He posted this on 12th March at 15:37 on Facebook:

“I don’t know what I should do. The police has been threatening me, saying that if I don’t come on my own, they will drag me out. Is this how an investigation is done? I have already given my statement in Gidam police station, and the second time to SIT members, Deep Mala kyashap and Santosh. Then why am I being threatened? My only fault is that on 20 Febuary, 2016, at 10:30 when Soni Sori called me on my phone, told me that she has been attacked and asked me to help, I panicked and took out my car to bring her back. This was probably my biggest mistake.

Soni Sori’s dad, brother, sister-in-law, maternal aunt and nephew to were taken to I.G. S.R.P Kalluri, but I didn’t go, because I know what the police would do, and that was exactly what happened. I.G. Kalluri wants to encounter me for being involved in Maoist activities. I’m happy to be dying. Death is inevitable. I cannot tell if there will ever be peace in Bastar. Before this also I have been provoked to be violent and even today they continue to do the same. I refuse to succumb. I accept death. 23rd March is an auspicious occasion for my death. If I die then, I will be content.

Why should Kaloori decide my death? I will make this decision myself. Why should I die in the hand of my perpetrators? The day when the Home Minister of Chhattisgarh- V.B Subhramaniam, Dantewara S.P. Kamalochand Kayshap, Dantewara Collector K.C. Dev, came to meet the children of Commander Soni Sori, the Home Minister asked me if I was responsible for the attack on her. I told them that she is my maternal aunt, why would I attack her? He then told me that he was just kidding. Till now I could not understand why the Home Minister would say such a thing, but I now understand what the Home Minister and the Chhattisgarh government want.

I went to lodge a complaint to the Human Rights Department team that had come from Delhi, but they said that they can’t file such a complaint. Why should we do? Where do we go? Whom do we tell? Will I be accused of Soni Sori’s attack and be put behind bars? I think that the police will go to any lengths to hide their incompetence. The people filing the complaints are being turned into the perpetrators.”

The original post in Hindi reads:
मुझे ये समझ में नही आ रहा हैं कि मैं क्या करू, पुलिस की S.I.T द्वारा धमकीया मुझे दिया जा रहा हैं, कि मैं नहीं गया तो मुझे घसीट कर ले जाएगे. क्या इस प्रकार जाच होता है? मैं एक बार गीदम थाने मे और दुसरे बार S.I.T के सदस्य दीपमाला कश्यप व संतोष को दे चुका हूं , फिर धमकिया क्यो दे रहे हैं. मेरी गलती यही हैं कि 20/2/16 की रात्री के 10:30 बजे सोनी सोरी का मेरे नंम्बर पर फोन आया सोनी सोरी बोली की उन पर हमला हुआँ हैं, मैं कुछ करू. उस वक्त मैं हडबडा गया और गाडी निकालकर उनको लेने गया, यह शायद मेरे लिए बहुत बड़ी गलती हैं. आज सोनी सोरी के पिता, भाई, भाई कि पत्नी, बुआ, बतीजा , को लेकर गया I.G. S.R.P. कल्लूरी के पास, मैं नहीं गया क्यों की मुझे पता हैं कि पुलिस क्या करती हैं, जिसका मैने अंदाजा लगाया था वही हुआ, आईजी कल्लूरी मेरा नक्सल के नाम पर एनकाउटर करना चाहता हैं मैं खुश हूं मुझे मौत का दुख नही हैं. आज नही तो कल मौत तो आएगी.बस्तर में शान्ती आएगी या नही मैं नही जानता, पहले भी मुझे हिंसा करने को उकसाया गया, आज भी मजबूर किया जा रहा है, मैं हिसा नही करूगा. मुझे मौत मंजूर है.मेरी मौत 23 मार्च तारीख शुभ दिन हैं. उस दिन मृत्यू मिले बहुत अच्छा होगा.कल्लूरी मेरी मौत क्यों तय करेगा मै खुद ही कर लेता हूं. मै अपराधी के हाथो मेरी मौत क्यो हो. जिस दिन छत्तीसगढ़ राज्य के ग्रह सचिव वी . बी. सुभ्रमणियम, दंन्तेवाड़ा S.P. कमलोचन कश्यप, दंन्तेवाड़ा कलेक्टर केसी देव सेनापति सोनी सोरी के बच्चों से मिलने आये थे. उसी दिन राज्य के ग्रह सचिव ने मुझसे कहां कि कही सोनी सोरी के ऊपर हमला आपने तो नही करवाया? मैने जवाब दिया की वे मेरी बुआ हैं उन पर मैं हमला क्यों करवाऊगा तब वे बोले कि वे मुझसे मजाक कर रहे हैं, मै अब तक समझ नही पा रहा था कि ग्रह सचिव ने ऐसा क्यो बोला लेकिन अब मुझे समझ आ गया हैं कि ग्रह सचिव व छत्तीसगंढ़ सरकार क्या चाहती हैं? मैं मानव अधिकार आयोग दिल्ली से जो टीम आयी हुई थी उनके पास भी शिकायत करने गये थे, उन्होने कहां कि वे हमारा शिकायत नहीं ले सकते, हम क्या करे? कहां जाए? किसको बताए? क्या छत्तीसगढ़ सरकार व जगदलपूर पुलिस प्रशासन मुझे सोनी सोरी के हमले का आरोपी बनाकर जेल डाल देगी. मुझे लगता है कि पुलिस अपनी नाकामयाबी साबित करने के लिए कुछ भी कर सकती हैं. जो शिकायत कर्ता व परिवार वाले हैं उन्हीं को अपराधी बनाया जा रहा हैं.


Translation and Report by Suvangana Agarwal.
Edited by Manisha.

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